आँकड़े
NCRB और संसद में रखे आँकड़े — पूरे देश का दर्पण, किसी एक परिवार का नहीं।
दर्ज मामले, 2024
48,669
दोषसिद्धि दर
33.9%
लंबित मुकदमे
2,87,694
व्यक्ति दोषसिद्ध
10,839
पाँच वर्ष, पूरे देश
| वर्ष | दर्ज | आरोप-पत्र | दोषसिद्ध मामले | दर | लंबित |
|---|---|---|---|---|---|
| 2020 | 45,995 | 36,178 | 2,613 | 42.5% | 1,77,379 |
| 2021 | 45,610 | 37,123 | 2,848 | 36% | 2,05,900 |
| 2022 | 52,866 | 42,450 | 4,876 | 34.1% | 2,33,600 |
| 2023 | 53,372 | 45,439 | 4,691 | 32.4% | 2,62,554 |
| 2024 | 48,669 | 40,614 | 5,192 | 33.9% | 2,87,694 |
- 202045,995
- 202145,610
- 202252,866
- 202353,372
- 202448,669
राज्य · दर्ज मामले (2024, निकटतम)
- उत्तर प्रदेश14,642
- राजस्थान7,200
- मध्य प्रदेश6,800
- बिहार6,100
- महाराष्ट्र2,800
- ओडिशा2,400
- आंध्र प्रदेश1,900
- तमिलनाडु1,700
- गुजरात1,601
- कर्नाटक1,500
नियम 12(4) — राहत का पैमाना
- मतदान से रोक / अपमान (कई धारा 3)₹85,000 – ₹1,00,000
- भूमि से बेदख़ली / बहिष्कार₹1,00,000 – ₹2,00,000
- यौन उत्पीड़न / बिना सहमति स्पर्श₹2,00,000
- बलात्कार₹5,00,000
- सामूहिक बलात्कार / अम्ल हमला / हत्या₹8,25,000
राष्ट्रीय आँकड़े जुलाई 2026 में राज्यसभा में रखे NCRB आँकड़ों (2020–2024) से हैं। दोषसिद्धि दर समाप्त मुकदमों पर है, दर्ज मामलों पर नहीं। राज्य-वार 2024 के आँकड़े सार्वजनिक उत्तरों और NCRB 2023 के अनुपात से निकटतम हैं। चार राज्य — उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार — लगभग दो-तिहाई मामले दर्ज करते हैं।