सार्वजनिक संकलन · SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989

आँकड़े

NCRB और संसद में रखे आँकड़े — पूरे देश का दर्पण, किसी एक परिवार का नहीं।

दर्ज मामले, 2024

48,669

दोषसिद्धि दर

33.9%

लंबित मुकदमे

2,87,694

व्यक्ति दोषसिद्ध

10,839

पाँच वर्ष, पूरे देश

वर्षदर्जआरोप-पत्रदोषसिद्ध मामलेदरलंबित
202045,99536,1782,61342.5%1,77,379
202145,61037,1232,84836%2,05,900
202252,86642,4504,87634.1%2,33,600
202353,37245,4394,69132.4%2,62,554
202448,66940,6145,19233.9%2,87,694
  • 202045,995
  • 202145,610
  • 202252,866
  • 202353,372
  • 202448,669

राज्य · दर्ज मामले (2024, निकटतम)

  • उत्तर प्रदेश14,642
  • राजस्थान7,200
  • मध्य प्रदेश6,800
  • बिहार6,100
  • महाराष्ट्र2,800
  • ओडिशा2,400
  • आंध्र प्रदेश1,900
  • तमिलनाडु1,700
  • गुजरात1,601
  • कर्नाटक1,500

नियम 12(4) — राहत का पैमाना

  • मतदान से रोक / अपमान (कई धारा 3)₹85,000 – ₹1,00,000
  • भूमि से बेदख़ली / बहिष्कार₹1,00,000 – ₹2,00,000
  • यौन उत्पीड़न / बिना सहमति स्पर्श₹2,00,000
  • बलात्कार₹5,00,000
  • सामूहिक बलात्कार / अम्ल हमला / हत्या₹8,25,000

राष्ट्रीय आँकड़े जुलाई 2026 में राज्यसभा में रखे NCRB आँकड़ों (2020–2024) से हैं। दोषसिद्धि दर समाप्त मुकदमों पर है, दर्ज मामलों पर नहीं। राज्य-वार 2024 के आँकड़े सार्वजनिक उत्तरों और NCRB 2023 के अनुपात से निकटतम हैं। चार राज्य — उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार — लगभग दो-तिहाई मामले दर्ज करते हैं।